Friday 13 November 2009

ऐ श्याम पुकारू



ऐ श्याम पुकारू तोहे बारम्बार
आजा श्याम आजा श्याम
दे जा मोहे तू अपना दीदार
अपने ही रंग में तू मोहे रंग दे
दीवानी अपनी मोहे बना जा
मेरी आँखों में तू अपना
प्रेम समुन्द्र का जल छिड़का जा
मेरे हृदय सिंघासन पे आ
मोहे श्याम खुद बी खुद अपनी बना
मैं न जानू कुछ भी
ज्ञान भक्ति वैराग्य कुछ भी न जानू श्याम
जानू तो बस तेरा इक नाम जानू
बस इतना ही जानू
के तू हैं मेरा सचा सहारा
तू ही मेरा यार तू ही दिलदार
तू ही तो हैं मेरा प्रीतम प्यारा
आजा न श्याम आजा

Thursday 12 November 2009

कैसी लीला



कैसी लीला तू श्याम दिखा रहा हैं
इंसान ही बन बैठा दुश्मन
प्यारे भोले भाले जीवो का
क्या बिगाडा इन्होने किसी का
जो यूँ हत्यारा बन बैठा इंसान
शायद यह इंसान हैं ही न
इंसान के भेस में छिपा शैतान हैं
आ ना सांवरिया कर अब सबका उद्धार
तेरा नाम जपने से तो
कहते हैं न हो जाता बेडा पार
पर मुझे कुछ न चाहिए श्याम
अब आ जा
कर दे अब तू इनका कुछ इंतजाम
श्याम तेरी राह निहारु
हर पल सिर्फ तोहे पुकारू आ जा रे

सुन ले मेरी पुकार


कैसे करू कान्हा मैं तेरा श्रृंगार
पायल पहनाऊ मैं पग में
चरणों से तेरे लिपट लिपट जाऊ
मैं तो श्याम तेरे गुण गाऊ
चाहे न जानू मैं करना तेरा गुणगान
फिर भी अपनी अटपटी भाषा में
हरदम सिमरु मैं तेरा नाम
कोई कर यतन कोई कर प्रयास
बुला ले मोहे अपने चरणों के पास
चाहे मुझे बुला ले या खुद आ
अब तो कर रही सारी दुनिया इंतज़ार
तेरे सब भक्तो को हैं बस तेरा सहारा मेरे श्याम
अब आ जा अब न देर लगा
देख कैसे हैं जुल्मो की आंधी छाई
अब आ जा अब आ जा
सुन ले मेरी पुकार

Tuesday 10 November 2009

हे श्यामसुंदर कृपा कीजे



हे श्यामसुंदर कृपा कीजे
चरणकमल में मुझे रख लीजे
कृपा कीजे कृपा कीजे
चरणकमल रज मुझको दीजे
दासी अपनी मोहे बना लीजे
मोहन चरणों में अपने मोहे रख लीजे
हे श्यामसुंदर कृपा कीजे
चरणकमल में मुझे रख लीजे
कृपा कीजे कृपा कीजे
बना दो मोहे तुम इक घुंघरू
पायल में तेरी छम छम बजा करू
नाचा करू मैं संग संग में तेरे
कृपा कीजे कृपा कीजे
हे श्यामसुंदर कृपा कीजे
चरणकमल में मोहे रख लीजे
बना दो मोहे तुम पुष्प की पाती
भक्तो के हाथो से चरणों में आऊ
भक्तो के संग संग नाम तेरा मै गाऊ
तुझ पे हो अर्पण तुझी की हो जाऊ
हे श्यामसुंदर कृपा कीजे
चरणकमल मै मोहे रख लीजे
कृपा कीजे कृपा कीजे

Monday 9 November 2009

बस तुम आ जाओ



दिन, महीने,ऋतू,गुजरे कई हैं साल
तूने होकर के साथ भी
क्यों न दरस दिखाया श्याम
माना के काबिल हूँ नही तेरे दरश के
फिर भी मन में लगाई हुई हैं आस
तेरा नाम रटती हैं मेरी हर शवास
कहती हूँ पल पल तुझे साँवरिया
आ जा दे जा दर्शन इक बार साँवरिया
तू नैना मूँद खो ख्यालो में राधा जू के
सुनाना बांसुरी की प्यारी तान
ओह श्याम....क्या कहूँ,
कुछ कहा ही नही जाता
बस तुम आ जाओ

Sunday 8 November 2009

मेरी श्यामसुन्दर से लगी यारी



मेरी श्यामसुन्दर से लगी यारी
श्यामसुन्दर से मेरी प्रीत पुराणी
दिन में आवे न तनिक चैन
रातो को सतावे तेरे मीठे बैन
क्या कहू मै कान्हा
आँखों से ओझल हुई हैं नींद
मन मे बसी हैं तेरी मूरत सुहानी
आ जा श्यामसुन्दर बुलाते हैं तेरे मीत
आ जा प्यारे सुना जा फिर कोई प्यारा सा गीत
दे जा दरस तू अपने
बना जा अपना जरा साँवरिया

Saturday 7 November 2009

बृजराज कन्हैया की अनोखी हैं अदा



बृजराज कन्हैया की अनोखी हैं अदा
पर्दानशीं हैं वो साँवरा मेरा
मुझमे ही बैठा हैं वो छिप के कहीं पे
रोम रोम में हैं मेरे अंतर मन में
हम में रह कर हमी से करते हैं पर्दा
देखा हैं ऐसा दिलदार कहीं साँवरा
हम भी उसको ही पुकारें हैं
जिद्द अपनी हम भी ठाने हैं
इक बार तो दर्शन करवा दो बिहारी
इक बार तो आ जाओ
मुरली की तान सुना जाओ
मेरी आत्मा में तुम समा जाओ
मुझे अपना तुम बना जाओ
मुझे अपने में समा जाओ
श्याम सरकार मेरे इक बार तो आ जाओ